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इस रोग को शरीर मे आने के बाद २ से ४ दिन का समय फैलने मे लगता है, रोग के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ मे 39डिगà¥à¤°à¥€ [102.2 फा] तक का जà¥à¤µà¤°, धड और फिर हाथों पैरों पे चकते बन जाना, शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जोडाठमे पीडा होना शामिल है इसके अलावा सिरदरà¥à¤¦, पà¥à¤°à¤•ाश से à¤à¤¯ लगना, आखों मे पीडा शामिल है। जà¥à¤µà¤° आम तौर पर दो से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिन नहीं चलता है तथा अचानक समापà¥à¤¤ होता है, लेकिन अनà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ जिनमें अनिदà¥à¤°à¤¾ तथा निरà¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ à¤à¥€ शामिल है आम तौर पर 5 से 7 दिन तक चलतें है रोगियों को लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक जोडों की पीडा हो सकती जो उनकी उमà¥à¤° पर निरà¥à¤à¤° करती है। मूल रूप से यह रोग उषà¥à¤£à¤•टिबंधीय अफà¥à¤°à¥€à¤•ा तथा à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ मे पनपता है जहाठयह रोग à¤à¤¡à¤¿à¤¸ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ के मचà¥à¤›à¤° मानवों मे फैलाते है। यह रोग मानव- मचà¥à¤›à¤°- मानव के चकà¥à¤° मे फैलता है। चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ शबà¥à¤¦ की उतपतà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ से हà¥à¤ˆ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस रोग का रोगी दरà¥à¤¦ से दà¥à¤¹à¤°à¤¾ हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उसके जोडों मे à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• दरà¥à¤¦ होता है। मकोंडे à¤à¤¾à¤·à¤¾ में चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का अरà¥à¤¥ होता ही है वो जो दà¥à¤¹à¤°à¤¾ कर दे। इस रोग के विषाणॠमà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से बनà¥à¤¦à¤° मे पायें जाते है, किंतॠमानव सहित अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ à¤à¥€ इस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है।
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